संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत क्यों और कैसे क्या जाता है ?

 

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत

हिन्दू परंपरा के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत किया जाता है | हिन्दू कैलेंडर के अनुसार 3 दिसंबर , 2020 यानि आज के इस दिन को ही व्रत रखने का दिन है |
और आप अगर अगले महीने के चतुर्थी तिथि जानना चाहते हैं तो आपको बता दें कि अगला चतुर्थी 2 जनवरी दिन शनिवार को पड़ने वाला है |

आज के इस चतुर्थी के व्रत को गणाधिप सकष्टि चतुर्थी भी कहते हैं | व्रत करने वाले लोगों का मानना है कि इस व्रत को करने से सभी मनोकामनायें पुरे होते हैं | यह व्रत भगवान गणेश जी के लिए किया जाता है |

अगर आप भी व्रत को करने की इच्छा रखते हैं या फिर इसके विधि को जानना चाहते हैं , तो जरा ध्यान दें कि
चतुर्थी व्रत करने के विधि में सबसे पहला काम है कि सूर्य उगने के पूर्व ही आप उठकर व नाहा धोया कर तैयार हो जाएँ | और एक छोटी सी चौकी लेकर उस पर गंगाजल छिड़क दें |

अब उस चौकी पर पीले रंग का कपडा बिछाकर गणेश जी के मूर्ति या फोटो को उस पर रख दें | साथ ही उसके सामने धुप , अगरबत्ती और दीप भी जलाएं |

इसके बाद गणेश भगवान को पीले रंग के फुल का माला चढ़ाएं | अगर आपके आसपास दूर्वा घास हो , जिस दूप भी कहते हैं , तो माला के साथ साथ उसे भी चढ़ाएं | कहा जाता है कि भगवान गणेश को दूर्वा घांस बहुत पसंद है |

फिर इसके बाद गणेश चालिषा , गणेश स्त्रोत और गणेश स्त्रोत व बाकी गणेश मन्त्रों का जाप करें |

अब गणेश भगवान की आरती करके उनको भोग लगाना है अगर पॉसिबल हो तो बेसन के लड्डू का प्रसाद बनायें क्युकी गणेश भगवान का पसंदीदा लड्डू माना जाता है | और पूजा का आरती घर के सभी सदस्यों को दिखायें |

चन्द्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत तोड़ लें | यहाँ पर चतुर्थी व्रत का विधि समाप्त होता है