इतने महान थे हमारे भारत के शहीद गुरु तेग बहादुर जी….😮

 

दोस्तों आपने कही न कहीं ,कभी न कभी ” गुरु तेग बहादुर जी” का नाम तो सुना ही होगा , और अगर ये नाम आपने नहीं सुना है तो आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है , मैं ये नाम और इस नाम के बारे में आपको विस्तार से बताने वाला हूँ |

दोस्तों सबसे पहले सोचने की बात ये है कि गुरु तेग बहादुर इतना महत्वपूर्ण क्यू हैं की भारत के वर्तमान सरकार के पक्ष और विपक्ष , दोनों ही तरफ के नेताओं की तरफ से इतना सम्मान प्रदर्शित किया जा रहा है?

सबसे पहले ट्विटर पर भारत के ‘ पर्यावरण मंत्री ‘ का ट्विट देखिये , जहाँ उन्होंने कहा है ;
” ‘धरम हेत साका जिनी कीआ , सीस दीआ पर सिरड न दीआ ‘
धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले सिखों के गुरु , गुरु तेग बहादूर जी के शत शत नमन ”

 

यहाँ तक कांग्रेस और बीजेपी के ऑफिसियल ट्विटर अकाउंट से भी ऐसे ट्विट किये गए हैं |

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गुरु तेग बहादुर उन्ही महान हस्तियों में से एक थे , जो प्राचीन भारतीय धर्मों के रक्षा के लिए मुगलों के सामने अपना बलिदान दे दिया था |

गुरु तेग बहादुर का जन्म 1 अप्रैल , 1621 को अमृतसर में हुआ था , सिक्खों के नौवें गुरु के रूप में हर साल हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से 1 अप्रैल को ‘ गुरु तेग बहादुर जयंती ‘ मनाया जाता है तथा 24 नवम्बर को उनके मृत्यु पर ‘गुरु तेग बहादुर शहादत दिवस ‘ मनाकर उनके महान बलिदान को याद किया जाता है |

गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान बहुत ही दर्दनाक तरीके से हुआ था , इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए ऐसे ही ध्यानपूर्वक बने रहें|

तो बात शुरू तब से ही हो गई थी जब मुगलों की यह निति की भारत के सभी हिन्दुओं का और अन्य धर्मों के लोगों का इस्लाम में धर्मपरिवर्तन कराया जाये , और तब बाबर , जो भारत में 1526 ई. में भारत का पहला मुग़ल शासक बना था , उसके ही वंश का तानाशाही शासक अब 1658 ई. में ”औरंगजेब ” नाम का शासक शासन कर रह था , जिसका नाम ‘आलमगीर ‘ भी था |

उसके समय में भारत के विभिन्न जगहों पर अलग – अलग धर्मों के लोग , उसके इस जबरजस्ती धर्मपरिवर्तन यानि अपने पूर्व धर्म का त्याग करके इस्लाम को अपनाने का नियम से , दुखी थे | ऐसे में कश्मीरी पंडित भी परेशान होकर , धर्म के रक्षा करने वाले महान गुरु तेग बहादुर के पास गए , और उनसे इस विषय में सहायता की मांग की |

गुरु तेग बहादुर ने इस विषय पर अत्यन दुःख जताते हुए , औरंगजेब का विरोध किया | लेकिन औरंगजेब ने उल्टा तेग बहादुर जी को इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर करने के लिए कोशिश किया |

लेकिन गुरु तेग बहादुर जी की वीरता था ऐसी थी की उन्हों इस्लाम अपनाने से साफ़ इनकार कर दिया , और कहा कि ‘ सीस कटा सकते हैं पर केश नहीं ‘ | इसलिए 24 नवम्बर ,1675 ई . को दिल्ली के चांदनी चौक में औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर का सबके सामने सिर कटवा दिया | इसलिए आज 24 नवम्बर को प्रतिवर्ष ‘गुरु तेग  बहादुर शहादत दिवस ‘ मनाया जाता है |

और आज जिस जगह पर यह दर्दनाक हादसा हुआ था उस जगह को ‘शीशगंज ‘ नाम से जाना जाता है | और वहां के दो गुरुद्वारा ‘ गुरुशिष गंज साहिब ‘ और गुरुद्वारा ‘रकाब गंज साहिब नाम से उनके बलिदानों याद दिलाते हैं |

गुरु तेग बहादुर का यह बलिदान ना केवल धर्म पालन के लिए बल्कि समस्त मानवीय सांस्कृतिक विरासत के लिए था |

इसके अलावा उनके बचपन को देखा जाये , तो वे बचपन से ही एक वीर और साहसी पुरुष रहे हैं | गुरु तेग बहदुर के बचपन का नाम त्यामल था | मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने पिता ‘हरगोविंद सिंह ‘ जी के साथ मुगलों के हमले के खिलाफ हुए युद्ध में उन्होंने अपनी वीरता साबित कर दी थी | इस वीरता से प्रसन्न होकर उनके पिता ने उनका नाम ‘ तेग बहादुर ‘ रख दिया था | जिसका मतलब मतलब ‘ तलवार के धनी ‘ होता है |

बाल्यावस्था से ही संत स्वरुप और उदार सोच के कारण वे सिक्खों के 8 वें गुरु ” हरिकृष्ण राय ” जी के परम शिष्य बन गये थे | उनके गुरु के अकाल मृत्यु के कारण उनके बाद गुरु तेग बहादुर को सिखों का 9 वां गुरु बना दिया गया |

गुरु तेग बहादुर , धर्म प्रचार के लिए जहाँ जहाँ भी जाते , उनसे प्रेरित होकर लोग नशा करने और नशीले पदार्थों की खेती करने का त्याग कर देते, इसके अलावा अन्य बुराईयों का भी त्याग करते |

उनके धर्म प्रचार के देश भर में यात्रा के वक़्त , सन् 1666 में गुरुतेग बहादुर के यहाँ पटना साहब में एक महान पुत्र का जन्म हुआ , जो बाद में बड़े होकर गुरु गोविन्द सिंह जी के नाम से और सिक्खों के 10 वें गुरु के रूप में जाने जाने लगे |

इस तरह से आपको अब पता चल गया होगा की ‘ गुरु तेग बहादुर ‘जी कितने महान थे , और 24 नवम्बर को ‘ गुरु तेग बहादुर दिवस क्यों मनाया जाता है | ऐसे ही और रोचक तथ्यों के लिए , जानकारी के लिए , समाचार के लिए हमारे साथ बनें रहे और हमारे सोशल मीडिया पर हमसे जुड़े रहें |