तुलसी विवाह क्यों किया जाता है?

तुलसी विवाह:

हिन्दू मान्यता के अनुसार , इस दिन को  भगवान विष्णु  द्वारा अपने अगले जन्म में वृंदा से शादी करने के आशीर्वाद के रूप में, विष्णु – शालिग्राम के रूप में – प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी से विवाह किया। इस कार्यक्रम को मनाने के लिए, तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। एक अन्य कथा के अनुसार मन जाता है कि  इस दिन लक्ष्मी ने एक राक्षस को मार डाला था और वह तुलसी के पौधे के रूप में धरती पर रही।

भगवान विष्णु ने क्यों की तुलसी से शादी?

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह का इतिहास उस समय से जुदा हुआ है जब भागरान का शकंर का अंश या कहा जाए तो रुद्रांश जिसका जालंधर नाम था , देवी वृंदा यानि देवी तुलसी से विवाह करके अमर होना चाहता था | लेकिन भगवान विष्णु ने राक्षसों का विनाश करने के लिए उसके इच्छा को पूरा नहीं होने दसिय और देवी वृंदा से स्वयं विवाह कर लिया |

तब से हिन्दू कैलेंडर के तिथि के अनुसार हर साल कार्तिक मॉस के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवी वृंदा यानी तुलसी जी से भगवान विष्णु जी का विवाह किया जाता हैं |

कैसे मनाया जाता है तुलसी विवाह?

तुलसी विवाह के दिन, सूर्योदय के पहले उठकर स्नान करके साफ़ कपडा पहना जाता है | इसके बाद तुलसी देवी को स्नान कराकर जल चढ़ाया जाता है | अब देवी तुलसी पर श्रृगार का सामान ,वस्त्र , चूड़ियाँ , मेहंदी और बिंदी आदि अर्पित किया जाता है | इर शालिग्राम को दूल्हा जैसे तैयार करके विधिपूर्वक तुलसी जी के साथ विवाह करवाया जाता है |

क्या वृंदा और तुलसी एक ही हैं?

तुलसी, तुलसी या वृंदा (पवित्र तुलसी) हिंदू मान्यता में एक पवित्र पौधा है। हिंदू इसे देवी तुलसी की सांसारिक अभिव्यक्ति के रूप में मानते हैं; उसे लक्ष्मी के अवतार के रूप में माना जाता है, और इस प्रकार भगवान विष्णु की पत्नी। अन्य किंवदंतियों में, उसे वृंदा कहा जाता है और लक्ष्मी से अलग है।

हर दिन तुलसी पूजा कैसे करें?

आसपास की सफाई करें। एक तेल का दीपक जलाएं। दोनों हाथों से कलश को धारण करते हुए तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, तुलसी विवाह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को होता है। इस दिन शालिग्राम और तुलसी का विवाह किया जाता है। शालिग्राम भगवान विष्णु की प्रतिकृति है। हर साल कार्तिक शुक्ल एकादशी या देव एकनी एकादशी पर तुलसी का विवाह क्यों किया जाता है? इस बारे में जानने के लिए, आपको इससे संबंधित किंवदंती को पढ़ना चाहिए। इसमें भगवान विष्णु पर वृंदा के श्राप का वर्णन है।

क्या थी तुलसी की शादी?

नारद पुराण के अनुसार, एक समय, ऋषि-मुनि, देवता और मानव सभी दानव राजा जालंधर के अत्याचारों से बहुत परेशान थे। वह बहुत क्रूर और बहादुर था। इसके पीछे वृंदा का गुण था, जो पत्नी अपने पति के धर्म का पालन करती थी, क्योंकि वह पराजित नहीं हुई थी। उनके परेशान देवता भगवान विष्णु के पास गए और उनसे पूछा कि उन्हें कैसे हराया जाए। तब भगवान श्रीहरि ने वृंदा की पवित्रता को तोड़ने का उपाय सोचा।

भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण किया और वृंदा को स्पर्श किया। जिसके कारण वृंदा का धर्म भंग हो गया और जालंधर युद्ध में मारा गया। भगवान विष्णु द्वारा धोखा दिए जाने और अपने पति से अलग होने पर दुखी, वृंदा ने श्रीहरि को शाप दिया कि उसकी पत्नी को भी धोखा दिया जाएगा और तुम अपनी पत्नी को तोड़ दोगे। इसके लिए आपको धरती पर जन्म लेना होगा। इस श्राप को देने के बाद वृंदा सती हो गई। उस स्थान पर तुलसी का पौधा उगा। रामावतार में, सीता शाप के कारण मर जाती हैं और श्रीराम की पत्नी के वियोग को सहन करती हैं। एक अन्य किंवदंती में कहा गया है कि वृंदा ने अपने क्रूर व्यवहार के कारण भगवान विष्णु को पत्थर होने का शाप दिया था। इस वजह से, भगवान विष्णु को शालिग्राम के रूप में पूजा जाता है।

वृंदा का पतिव्रता धर्म तोड़ने से भगवान विष्णु को बहुत ग्लानि हुई। तब उन्होंने वृंदा को आशीष दिया कि वह तुलसी स्वरुप में सदैव उनके साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि कार्तिक शुक्ल एकादशी को जो भी शालिग्राम स्वरुप में उनकी शादी तुलसी से कराएगा, उसकी मनोकामना पूर्ण होगी। तब से तुलसी विवाह होने लगा।