छठ पूजा का पहला अरग कब है? छठ पूजा कैसे मनाया जाता है?

छठ पूजा का पहला अरग कब है? छठ पूजा कैसे मनाया जाता है? छठ पूजा का क्या महत्व है? 2020 में कार्तिक छठ पूजा कब है? कार्तिक का छठ कब है? छठ पूजा में किसकी पूजा होती है? तिल छठ कब है?

छठ पूजा क्या है?

छठ पूजा एक प्राचीन हिंदू वैदिक त्योहार है जो ऐतिहासिक रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के मूल निवासी मनाते है, विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश और नेपाल के मध्य क्षेत्र में । दीपावली के ठीक छः दिन बाद छठ पूजा किया जाता किया जाता है | छठ पूजा में सूर्य भगवान और छठी मईया जी का पूजन किया जाता है |

 

छठी मईया कौन है ?

भारतीय हिन्दू मान्याताओं के अनुसार , छठी मईया , सूर्य भगवान के बहन “उषा” को कहा जाता है | हिन्दू कैलेंडर के कार्तिक महिना की षष्टी तिथि को छठ मनाया जाता है | छठे दिन पूजी जाने वाली षष्ठी मइया को बिहार में आसान भाषा में छठी मइया कहकर पुकारते हैं | मान्यता है कि छठ पूजा के दौरान पूजी जाने वाली यह माता सूर्य भगवान की बहन हैं | इसीलिए लोग सूर्य को अर्घ्य देकर छठी मईया को प्रसन्न करते हैं | वहीं, पुराणों में मां दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी देवी को भी छठ माता का ही रूप माना जाता है | छठी मइया को संतान देने वाली माता के नाम से भी जाना जाता है | मान्यता है कि छठ पर्व संतान की प्राप्ति और संतान की सुख और समृद्धि के लिए किया जाता है |

छठ पूजा क्यों किया जाता है ?

यह सूर्य देव को समर्पित एकमात्र वैदिक त्योहार है, जिसे सभी शक्तियों का स्रोत माना जाता है । प्रकाश, ऊर्जा और जीवन शक्ति के देवता सूर्य की यह पूजा मानव की भलाई, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए की जाती है । इस त्योहार के माध्यम से, लोग चार दिनों की अवधि में पूजा करके सूर्य देव को धन्यवाद देना चाहते हैं । इस त्योहार के दौरान उपवास रखने वाले भक्तों को व्रती कहा जाता है।

इस पर्व का नाम छठ क्यों पड़ा ?

छठ शब्द का अर्थ नेपाली या हिंदी संस्कृत भाषा में छः होता है और चूंकि यह त्योहार कार्तिक महीने तथा दीपावली त्यौहार के छठे दिन मनाया जाता है, इसलिए इस त्योहार को एक ही नाम दिया गया है।

क्या है नहाय खाय ?

पूजा के पहले दिन, भक्तों को पवित्र नदी में डुबकी लगानी होती है और अपने लिए उपयुक्त भोजन पकाना होता है । इस दिन, चन्ना दाल के साथ कद्दू भात एक आम तैयारी है और मिट्टी के पीतल के बर्तनों और आम की लकड़ी का उपयोग करके मिट्टी के चूल्हे के ऊपर पकाया जाता है । जो महिलाएं व्रत का पालन करती हैं वे इस दिन केवल एक समय भोजन कर सकती हैं ।

क्या है लोहंदा खरना ?

दूसरे दिन, भक्तों को पूरे दिन का व्रत रखना होता है, जिसे वे सूर्यास्त के कुछ समय बाद तोड़ सकते हैं। व्रती अपने द्वारा पूरे प्रसाद को पकाते हैं जिसमें खीर और रोटी शामिल हैं और वे इस प्रसाद के साथ अपना उपवास तोड़ते हैं, जिसके बाद उन्हें 36 घंटे तक बिना पानी पिए उपवास करना पड़ता है।

संध्या अर्घ्य ?

यह पर्व का तीसरा पडाव या दिन होता है | इस दिन घर पर प्रसाद तैयार करके और फिर शाम को नदी के किनारे व्रतियों के पूरे घर के साथ पूजा किया जाता है, जहां वे सूर्य को अर्घ्य देते हैं । महिलाएं आमतौर पर हल्की पीली साड़ी पहनती हैं। शाम को उत्साहित लोक गीतों के साथ त्योहार को और भी बेहतर बनाया जाता है।

उषा अर्घ्य ?

अंतिम दिन यहाँ, सभी भक्त उगते सूरज को प्रसाद बनाने के लिए सूर्योदय से पहले नदी तट पर जाते हैं। त्योहार तब समाप्त होता है जब व्रती अपना 36 घंटे का उपवास समाप्त करते हैं और रिश्तेदार प्रसाद लेने के लिए उनके घर आते हैं।

छठ पूजा का प्रसाद?

छठ प्रसाद पारंपरिक रूप से चावल, गेहूं, सूखे मेवे, ताजे फल, नट्स, गुड़, नारियल और बहुत सारे और बहुत से घी के साथ तैयार किया जाता है। छठ के दौरान तैयार किए गए भोजन के बारे में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि वे पूरी तरह से नमक, प्याज और लहसुन के बिना तैयार होते हैं।
ठकुआ छठ पूजा का एक विशेष हिस्सा है और यह मूल रूप से पूरे गेहूं के आटे से बना एक व्यंजन है जिसे आपको त्योहार के दौरान अवश्य देखना चाहिए।

छठ पूजा 2020 :

छठ पर्व की तारीख
तारीख 18 नवंबर 2020, पूजा के पहले दिन बुधवार को छठ पूजा का पहला पडाव ” नहाय-खाय ” के अनुसार पूजा प्रारम्भ होगा |
तारीख 19 नवंबर 2020,पूजा प्रारम्भ के दुसरे दिन गुरुवार को छठ पूजा का दूसरा पडाव ” खरना ” के रस्म का पालन होगा |
तारिख 20 नवंबर 2020, पूजा के तीसरे दिन शुक्रवार को डूबते सूर्य का अर्घ्य दिया जाएगा |
तारीख 21 नवंबर 2020, पूजा के अंतिम दिन शनिवार को उगते सूर्य का अर्घ्य दिया जाएगा |

#पहला अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 20 नवंबर, 06:48 AM
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – 20 नवंबर, 05:26 PM